बरसात का कहर ( मेरा अनुभव)
बरसात का कहर
रोज की तरह उस दिन भी मैं सुबह 6:00 बजे का अलार्म लगा कर सो गई । सुबह जब अलार्म की घंटी बजी और मेरी आंख खुली कि जल्दी उठो तैयार होकर कॉलेज जाओ तभी पास में लेटी मेरी मां ने मुझसे कहा अरे कहां जा रही है, मैंने कहा सुबह हो गई कॉलेज जा रही हूं । बाहर के नजारे से मैं अनजान थी मां ने कहा रात से बरसात हो रही है अंधेरा छाया हुआ है और तुझे कॉलेज जाना है । मां की है बात सुनकर मेरा मन उदास हो उठा । मैं बाहर निकली तो देखा कि चारों तरफ पानी भरा पड़ा है बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी ।सुबह का वक्त था लेकिन बाहर का नजारा ऐसा था मानो काली रात हो ।
मुझे कॉलेज जाना बहुत पसंद है, घर में रहना मुझे बिल्कुल नहीं भाता इस वजह से मेरा मन उदास हो उठा था ।मैंने सोचा कुछ देर इंतजार कर लेती हूं बारिश बंद हो जाएगी तब कॉलेज चली जाऊंगी परंतु मैं इंतजार करती रही लेकिन पानी रुकने का नाम नहीं ले रहा था मैं उदास होकर फिर से सो गई कि अब कल ही कॉलेज जा पाऊंगी। मेरे पिताजी को अपने कार्यालय जाने के लिए देरी हो रही थी ।वह इंतजार कर रहे थे थोड़ी बूंदे कम हो जाए ताकि मैं अपने दफ्तर पहुंच सकूं परंतु बरसात का वह रूप देखकर जो कि रुकने वाला ना था मेरे पिताजी दफ्तर के लिए निकल गए तेज हवाओं और बादल के गरजने की आवाज से वह काफी डरे हुए थे । उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करते हुए अपने दफ्तर पहुंचे।
शाम को जब वह घर वापस आए तो बाहर का नजारा बताया की सड़कों पर पानी भरा हुआ था तेज हवाओं के कारण उन्हें अपनी गाड़ी चलाने में बहुत दिक्कत हो रही थी। शाम का समय था सभी लोग एक साथ बैठकर न्यूज़ चैनल देख रहे थे तभी न्यूज़ आई की 2 दिन तक यूपी में सभी स्कूल कॉलेज घनघोर वर्षा के कारण बंद रहेंगे यह न्यूज़ सुनकर जहां मैंने अपने मन को थोड़ा समझाया था मैं बहुत उदास हो गई कि 2 दिन घर पर ही रहना पड़ेगा तभी हमारे कॉलेज की तरफ से नोटिस आया की बरसात की वजह से 2 दिन हमारी ऑनलाइन क्लास होगी ।ऑनलाइन क्लास की बात सुनकर मैं और ज्यादा घबरा गई की कहीं लॉकडाउन ना लग जाए।
जहां मैंने मन को थोड़ी तसल्ली दी थी। वह टूट गई
और मैं उदास होकर सो गई।